Monday, October 13, 2008

आदरणीय , सम्मनित भारत देश नागरिको, सभी भारतवासी, भाइयों आज देश मैं एक ऐसी बहस छिडी हुई है जिस पर देश के एक जिम्मेदार नागरिक होते हुए आपकी अभिव्यक्ति जरुरी है । पुरे विश्व मैं शान्ति, सोहार्दा व् भाईचारे के लिए जाने वाला देश आज दंगो मैं जल रहा है। पुरे देश के भीतर एक ऐसा अनिश्चितिता का वातावरण बन गया है की मानो ऐसा लगता है कि इस देश मैं लोकतंत्र हो ही न । सम्मानित देशवासियो और प्रबुद्ध नागरिको आज़ादी के साठ वर्ष बीत चुके हैं । इन साठ वर्षों मैं देश को कमज़ोर करने के लिए पड़ोसी मुल्को द्वारा अनके कोशिशें हुई , लेकिन भारत माता के सच्चे सपूतों ने देश कि खातिर अपने प्राणों कि बजी लगा दी। मैं यह मानता हूँ कि भारत कि आज़ादी के बाद से देश मैं सांप्रदायिक सोहादा मैं कमी आई है , इसी भारत मां कि लाज रखने के लिए चंद्रशेखर आजाद , बिस्मिल्लाह खान और भगत सिंघ जैसे वीरो ने जान देना स्वीकार कर लिया लेकिन देश भक्ति के जज्बे से विमुख नहीं हुए । इस बात का उल्लेख यहाँ पर इसलिए किया कि आज़ादी से पहले हमारा केवल एक धर्म था , भारत माँ कि शान बांये रखना । लेकिन आज देश मैं देश के ही भीतर दहशतगर्दो कि एक ऐसी फौज खड़ी हो गई है कि इसने देश कि अस्मिता और भाईचारे को खाक मैं मिला दिया है । मुझे ऐसा लगता है कि कहीं न कहीं घर से मिलने वाले संस्कारो मैं , स्कूल से मिलने वाली सिक्षा मैं , बड़े बुजुर्गो से मिलने वाली सलाह व् अनुभवों मैं कहीं न कहीं कोई कमी जरूर रह गई है जिसे आज के ये नौनिहाल आंतकवाद के रास्ते पर जाने को विवश हुए हैं। अन्यथा आज जो कुछ कंधमाल मैं , असम मैं , डेल्ही मैं और देश के अन्य भागो मैं दहशतगर्द कर्वैइयें हो रही है वेः कभी नहीं होती ।
आज जब सारा विश्व भारत कि बढती ताकत से चकित है और अन्य देश भारत कि ओर आशा भरी निगाहों से देख रहे हैं ऐसी इस्थी मैं मेरा मन्ना है कि जब तक देश मैं चाहे वे किसी भी मजहब के हों घर से संस्कार मिलने जरुरी हैं । और इसमे माता पिता, गुरुजनों और समाज के प्रबुद्ध नागरिकों का प्रयत्न आवश्यक है ,। इस अवसर पर कुछ पंक्तियाँ ययद आ रही है मजहब नहीं सिखाता आपस मैं बैर रखना ।
अंत मैं देश कि अमन और खुशाली कि दुआ के साथ,,, क्रमशः
पवन कुमार

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