कुछ दिन पहले ३० अक्टूबर को हमने श्री गुरु ग्रन्थ साहिब जी के ३०० वर्ष गुरु के रूप मैं पुरे करने पर गुरुता गद्दी दिवस मनाया। यह वास्तव मैं बहुत खुशी का दिन था एक हिंदू होने के नाते मेरे लिए भी क्युओंकी सिख गुरुओं के आशीर्वाद से ही हिंदू धर्म बच सका। गुरुनानक देव जी ने मानवता को एक लड़ी मैं पिरोने का सूत्र दिया और कहा एक नूर ते सब जग उपज्या कौन भले कौन मंदे। वहिमन चौथे गुरु श्री रंदास ने मानव जीवन का लक्ष्य केवल परमपिता परमेश्वर की प्राप्ति बताया।
जैसा मैं जनता हूँ प्राचीन काल मैं जब तैमुर से लेकर औरंगजेब हिन्दुओं पट आत्याचार कर रहे थे तब हर हिंदू के गहर से ५ वन पुत्र गुरूद्वारे को दिया जाता था। मैं उस दिन ख़ुद को नहीं रोक सका जब यह पता चला की ९गुरु श्री तेग बहादुर जी ने हमारी हिंदू धर्म की रक्षा की खातिर अपना शीश कुर्बान कर दिया वहीँ दशम गुरु गोबिंद सिंह ने भी अप्पने छूते से पुत्रों को धरम रक्षा के लिए कुर्बान कर दिया, ऐसेपरमेश्वर के अवतार गुरु को सत-सत प्रणाम
आज्ञा भाई अकाल की तभी चलायो पंथ
सब सिखों को हुकुम है श्री गुरु मान्यो ग्रन्थ
गुरु ग्रन्थ साहिब जी हम सभी को सदमति प्रदान करे सतनाम श्री वाहेगुरु जी
Tuesday, November 4, 2008
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