Tuesday, November 4, 2008

हैप्पी गुरुता गद्दी दिवस


हैप्पी गुरुता गद्दी दिवस
श्री गुरु ग्रन्थ साहिब जी युगों युग अटल गुरु
पवन उप्रेती गुरु का दास

श्री गुरुता गद्दी दिवस

कुछ दिन पहले ३० अक्टूबर को हमने श्री गुरु ग्रन्थ साहिब जी के ३०० वर्ष गुरु के रूप मैं पुरे करने पर गुरुता गद्दी दिवस मनाया। यह वास्तव मैं बहुत खुशी का दिन था एक हिंदू होने के नाते मेरे लिए भी क्युओंकी सिख गुरुओं के आशीर्वाद से ही हिंदू धर्म बच सका। गुरुनानक देव जी ने मानवता को एक लड़ी मैं पिरोने का सूत्र दिया और कहा एक नूर ते सब जग उपज्या कौन भले कौन मंदे। वहिमन चौथे गुरु श्री रंदास ने मानव जीवन का लक्ष्य केवल परमपिता परमेश्वर की प्राप्ति बताया।
जैसा मैं जनता हूँ प्राचीन काल मैं जब तैमुर से लेकर औरंगजेब हिन्दुओं पट आत्याचार कर रहे थे तब हर हिंदू के गहर से ५ वन पुत्र गुरूद्वारे को दिया जाता था। मैं उस दिन ख़ुद को नहीं रोक सका जब यह पता चला की ९गुरु श्री तेग बहादुर जी ने हमारी हिंदू धर्म की रक्षा की खातिर अपना शीश कुर्बान कर दिया वहीँ दशम गुरु गोबिंद सिंह ने भी अप्पने छूते से पुत्रों को धरम रक्षा के लिए कुर्बान कर दिया, ऐसेपरमेश्वर के अवतार गुरु को सत-सत प्रणाम
आज्ञा भाई अकाल की तभी चलायो पंथ
सब सिखों को हुकुम है श्री गुरु मान्यो ग्रन्थ
गुरु ग्रन्थ साहिब जी हम सभी को सदमति प्रदान करे सतनाम श्री वाहेगुरु जी

गन्दी राजनीती बंद हो

महाराष्ट्र मैं हिन्दी भाषियों पर अत्याचार, असं मैं हिन्दी भाषियों की हत्या, पंजाब मैं नेताओं का कहना की पुनजब मैं बहरी लोग नोट अल्लोव्द, छट पूजा पर राजनीती इस तरह की बातें सुनना अब आदत सी हो गई है। एक ओअर तो हम देश को २०२० तक सुपेर्पोवेर बननेका सपना देख रहे हैं वहीँ दूसरी ओअर इतनी छोटी छोटीबातों को लेकर राजनीती की जा रही है।
जिस देश मैं आज भी ३० करोड़ से ज्यादा लोग बेरोजगार हो , जहाँ पर आज भी लाखों लोग मेडिकल फसिलितिएस के बिना मर जाते हों, जहाँ पर आज भी किसान आत्महत्या करने को मजबूर हों , लाखो लोगों के लिए छत्त न हो वहां पर इन सब बातो पर राजनीती करने का क्या मतलब है। क्या यह हैरानी की बात नहीं की
देश के ३६ अरबपतियों कीका कुल हिस्सा जीडीपी मैं १\३ है वहीँ दूसरी और देश के ६० करोड़ किसानो का जीडीपी मैं योगदान केवल .१७ परसेंट है । आख़िर इस तरह के मुद्दों पर राजनीती कर क्यों लोगों के बीच जहर घोला जा रहा है ।इसकी जितनी निंदा की जाए उती कम है आख़िर इस सबके लिए क्या केवल नेता जिम्मेदार हैं
मैं ऐसा नहीं मानता मैं इसके लिए देश के जनमानस को जिम्मेदार मानता हूँ देश के अन्दर एक धनि क्लास है जो वोट देने नहीं जाता उसका काम है की ५ साल तक नेताओ को कोसे , आखिर लोकतंत्र मैं जब आपको वोट का अधिकार मिला हुआ है फिर भी आप वट न देकर अपराधी और बदमाशों को बदाव दे रहे हैं। आख़िर कब तक देश मैं इस तरह के बेकार इस्सुए पर राजनीती होगी । ऐसा करकर हम क्योँ भारत मां के आँचल पर कालिख लगाने वालो को बढावा दे रहे हैं। आज जरूरत है अपनी निजी जिंदगी से कुछ समय निकलकर देश के बारे मैं सोचने की । उन सहीदो की सहादत बेकार न जाए जिन्होंने हमें आजादी का सूरज दिखने के लिए फांसी का तख्ता कबूल कर लिया लेकिन देश धर्म नहीं छोड़ा।
यदि आप एक सच्चे भार्तिएं हैं तो देश मैं इस तरह की बातो का विरोध इजिये क्योंकि अगर देश नेताओं के गुलाम बन गया तो फिर करोड़ रुपेस कमाने वाले भी इनके काले कारनामों की चपेट मैं होंगे।
अंतिम पंक्ति आप करोड़ पति बन सकते हैं, देश के प्रधानमंत्री बन सकते हैं, सब कुछ पा सकते हैं जो आप चाहते हैं लेकिन अपनी भारत मान को मुंह नहीं दिखा सकते क्योँ की यह भारत मान हर हिंदू, मुस्लमान, सिख और सबकी मां है अब हमारी मांकी इज्जत हमारे हातों मैं है। सच्चेबेटे हो तो मां के दूध का क़र्ज़ चुका दो वरना आप सब जानते हैं...........